Saturday, April 25, 2026
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रजत जयंती विशेष सत्र में दिखी परंपरा की झलक, पहाड़ी वेशभूषा में सजा उत्तराखंड विधानसभा का सदन

देहरादून। उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती के उपलक्ष्य में सोमवार को विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र शुरू हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर सदन का नज़ारा बिल्कुल अलग और पारंपरिक रंगों से सराबोर नजर आया। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण से लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और तमाम विधायक पारंपरिक वेशभूषा में दिखाई दिए।

सदन में जहां पुरुष सदस्यों ने पहाड़ी टोपी पहनकर अपनी संस्कृति का सम्मान किया, वहीं महिला सदस्यों ने पिछौड़ा और पारंपरिक नथ पहनकर देवभूमि की परंपरा को जीवंत कर दिया। पूरा सदन पारंपरिक वेशभूषा के रंग में ऐसा घुला कि मानो उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाया जा रहा हो।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का विधानसभा में ऐतिहासिक संबोधन

इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विशेष सत्र को संबोधित किया। यह उत्तराखंड विधानसभा के इतिहास में दूसरा अवसर रहा जब किसी राष्ट्रपति ने सदन को संबोधित किया। इससे पहले वर्ष 2015 में पूर्व राष्ट्रपति स्व. प्रणव मुखर्जी ने विशेष सत्र में अपना अभिभाषण दिया था।

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने राष्ट्रपति को उत्तराखंड की पारंपरिक ‘रम्माण कला’ पर आधारित स्मृति चिह्न भेंट किया। मुख्यमंत्री धामी और भाजपा के सभी नेता पारंपरिक टोपी में नजर आए, जिससे सदन का वातावरण पूरी तरह पारंपरिक और सांस्कृतिक आभा से भर गया।

अगले 25 वर्षों के विकास पर चर्चा का मंच बना सदन

रजत जयंती विशेष सत्र के दौरान प्रदेश सरकार ने राज्य के 25 वर्षों की विकास यात्रा के साथ आने वाले 25 वर्षों के विकास रोडमैप को सदन में चर्चा के लिए रखा। इस मौके पर सदन में न केवल विकास का दृष्टिकोण प्रस्तुत हुआ, बल्कि संस्कृति और परंपरा की झलक ने इस ऐतिहासिक दिन को और भी यादगार बना दिया।

पारंपरिक साज-सज्जा ने बढ़ाई रजत जयंती की शान

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी की पिछौड़ा और पारंपरिक नथ में झलकती उत्तराखंडी संस्कृति, मुख्यमंत्री धामी और अन्य विधायकों की पहाड़ी टोपी ने सदन को विशेष गरिमा दी। सदन की हर झलक ने यह संदेश दिया कि आधुनिकता के साथ उत्तराखंड अपनी परंपराओं पर गर्व करता है। रजत जयंती का यह विशेष सत्र संस्कृति, गर्व और विकास का संगम साबित हुआ।

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