Friday, October 23, 2026
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रजत जयंती पर विधानसभा का विशेष सत्र शुरू, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा—‘युवा ऊर्जा के साथ राज्य आगे बढ़े

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देहरादून। उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र सोमवार से शुरू हो गया। तीन दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य को युवा ऊर्जा, मातृशक्ति और समर्पण भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

सुबह विधानसभा सचिवालय में विशेष सत्र की शुरुआत विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने की। उन्होंने राष्ट्रपति को पारंपरिक ‘रम्माण कला’ पर आधारित स्मृति चिह्न भेंट किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने रम्माण कला पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन भी किया। सदन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, राज्यपाल ले. जन. गुरमीत सिंह (सेनि), नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, सभी विधायक, पूर्व मुख्यमंत्री, सांसद और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

राष्ट्रपति ने किया राज्य की 25 वर्ष की विकास यात्रा का उल्लेख

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि उत्तराखंड की 25 वर्ष की यात्रा समर्पण, संघर्ष और सेवा की कहानी है। श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में जनता की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए नवंबर 2000 में राज्य की स्थापना की गई थी। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में प्रदेश ने पर्यावरण, ऊर्जा, पर्यटन और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।

राष्ट्रपति ने कहा कि राज्य में साक्षरता दर में वृद्धि, महिलाओं की शिक्षा में विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने के प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने महिला सशक्तीकरण को राज्य की पहचान बताते हुए कहा कि “सुशीला बलूनी, बछेंद्री पाल और वंदना कटारिया जैसी महिलाओं की गौरवशाली परंपरा आगे भी बढ़ेगी।”

उन्होंने उत्तराखंड विधानसभा की पहली महिला अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण की नियुक्ति को ऐतिहासिक बताया और कहा कि विधानसभा में महिलाओं की संख्या में वृद्धि राज्य की प्रगतिशील सोच को दर्शाती है।

‘समान नागरिक संहिता लागू करने पर उत्तराखंड की सराहना’

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि समान नागरिक संहिता विधेयक (UCC) को पारित करने के लिए उत्तराखंड विधानसभा के सभी सदस्यों की सराहना की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब तक 550 से अधिक विधेयक पारित किए जा चुके हैं, जिनमें लोकायुक्त विधेयक, नकलरोधी विधेयक और जमींदारी विनाश विधेयक जैसे महत्वपूर्ण कानून शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि विधायक जनता और शासन के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। “जनता के प्रति निरंतर उत्तरदायी बने रहना हमारी संसदीय प्रणाली की शक्ति और चुनौती दोनों है।”

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने रखे जनमुद्दे

सत्र की शुरुआत में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने राष्ट्रपति का स्वागत किया और राज्य आंदोलन में प्राणों की आहुति देने वाले आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और हिमालय भारत भूमि के “ऑक्सीजन टावर” हैं। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी शिक्षा की कमी को राज्य की प्रमुख चुनौतियां बताया।

यशपाल आर्य ने कहा कि मातृशक्ति ने हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, लेकिन आज भी कई गांवों को वन अधिकार कानून के तहत अधिकार नहीं मिल पाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की महिलाएं जंगलों को अपना मायका मानती हैं, जैसे कभी गौरा देवी ने प्रकृति और जंगलों की रक्षा के लिए आंदोलन किया था।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा—25 वर्ष आत्मगौरव और संकल्प का क्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने स्वागत भाषण में राष्ट्रपति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होना आत्मगौरव का क्षण है। उन्होंने राज्य आंदोलनकारियों को नमन करते हुए कहा कि “हम उन आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जिनके लिए राज्य का निर्माण हुआ था।”

धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और राष्ट्रपति के आशीर्वाद से राज्य को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास जारी हैं।

राज्यपाल ने कहा—यह सत्र उत्तराखंड के उज्जवल भविष्य की नींव रखेगा

रजत जयंती के अवसर पर राज्यपाल ले. जन. गुरमीत सिंह (सेनि) ने कहा कि देवभूमि के प्रति राष्ट्रपति के स्नेह से उत्तराखंड के लोग अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि यह विशेष सत्र राज्य की 25 वर्ष की विकास यात्रा पर विचार-विमर्श और भविष्य के रोडमैप तय करने का अवसर बनेगा।

उन्होंने कहा कि “विकसित उत्तराखंड का अर्थ केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि ऐसा चहुंमुखी विकास है जिसमें प्रकृति और प्रगति दोनों साथ चलें।” राज्यपाल ने कहा कि पलायन रोकना, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाना और सुशासन को हर गांव तक पहुंचाना हमारा संकल्प है।

महिलाओं, युवाओं और पूर्व सैनिकों की भागीदारी से सशक्त हो रहा उत्तराखंड

राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश के विकास में मातृशक्ति, युवा शक्ति और पूर्व सैनिकों की अहम भागीदारी रही है। 25 वर्षों में राज्य ने पर्यटन, ऊर्जा और शिक्षा के क्षेत्र में अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने आह्वान किया कि “हर नागरिक बेहतर जीवन जी सके, महिलाओं को आगे बढ़ने का संबल मिले और किसान-युवा दोनों समृद्ध हों—इसी दिशा में उत्तराखंड को आगे बढ़ना है।”

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