नई दिल्ली। Twisha Sharma death case : त्विषा शर्मा की मौत के मामले में सीबीआई ने कानूनी शिकंजा आरोपी गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह पर कस दिया है। रिमांड मिलते ही जांच एजेंसी ने जो रूपरेखा तैयार की उसने आरोपियों के होश उड़ा दिए हैं।
Karnataka New CM : कर्नाटक के नए सीएम के लिए कांटों भरा ताज, सामने 5 बड़ी चुनौतियां
शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े बारह बजे रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को कोर्ट में पेश किया गया। करीब डेढ़ घंटे तक दोनों कटघरे में खड़े रहे। सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती पूछताछ में सीबीआई ने पूर्व जज के कानूनी तजुर्बे को ही ढाल बनाया।
गिरिबाला सिंह से सीबीआई ने किया ये सवाल
सीबीआई ने सवाल किया, “आप खुद जज रही हैं और कानून की हर बारीकी को अच्छी तरह जानती हैं। जब आपकी कोई गलती या कसूर नहीं था तो एफआईआर (FIR) दर्ज होने से पहले ही आपने अग्रिम जमानत की अर्जी क्यों लगाई? और बेटे समर्थ को फरार होने के लिए क्यों कहा?”
इस तीखे सवाल पर गिरिबाला सिंह पहले तो काफी देर तक खामोश रहीं, लेकिन बाद में उन्होंने बेहद दबी आवाज में स्वीकार किया, “हां, यह हमसे बड़ी गलती हुई।” उन्हें अंदाजा नहीं था कि अग्रिम जमानत की यह जल्दबाजी उन पर ही संदेह के घेरे को सबसे ज्यादा मजबूत कर देगी।
त्विषा की 80 किलो की डमी (Twisha Sharma death case)
सीबीआई इस हाई-प्रोफाइल केस के हर एक पहलू का वैज्ञानिक और फोरेंसिक विश्लेषण करने जा रही है। मुख्य आरोपी समर्थ ने अपने बयान में दावा किया था कि उसने त्विषा को फंदे से उतारा था और मां गिरिबाला ने फंदे की गांठ खोली थी। इस पहेली को सुलझाने के लिए सीबीआई उठाएगी बड़े कदम।
3D सीन रिक्रिएशन: सीबीआई त्विषा के मां-बाप को पूर्व जज के उसी भोपाल स्थित निवास पर ले जाएगी, जहां 3डी कैमरों से मैपिंग की गई थी। वहां 80 किलो वजनी (त्विषा के वजन के बराबर) डमी पुतले को फंदे पर लटकाकर पूरा घटनाक्रम दोहराया जाएगा।
गांठ खोलने का टेस्ट: रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को डमी लिगेचर (फंदे की रस्सी/कपड़ा) की गांठ को दोबारा उसी तरह खोलकर दिखाना होगा, जैसा उन्होंने उस रात करने का दावा किया है।
बेल्ट का स्ट्रेंथ टेस्ट: जिस बेल्ट से फंदा लगाने की बात कही जा रही है, सीबीआई फोरेंसिक लैब में उसकी मजबूती की जांच करेगी कि क्या वह बेल्ट सचमुच उतना वजन झेलने में सक्षम थी या कहानी कुछ और है।
बार-बार बयान बदल रहा समर्थ
सीबीआई के वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी समर्थ लगातार बयानों को बदल रहा है और जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। बयानों में आ रहे विरोधाभास को पकड़ने के लिए सीबीआई की टीम ने चक्रव्यूह तैयार किया है।
राउंड-1 (अकेले में): पहले मां और बेटे से अलग-अलग कमरों में एकांत में पूछताछ होगी और उनके बयानों को हूबहू रिकॉर्ड किया जाएगा।
राउंड-2 (क्रॉस चेकिंग): दोनों के बयानों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा कि घटना की रात की टाइमिंग मैच हो रही है या नहीं।
राउंड-3 (आमने-सामने): जिन-जिन सवालों के जवाबों में अंतर या विरोधाभास मिलेगा, उन बिंदुओं पर मां-बेटे को आमने-सामने बैठाकर सच उगलवाया जाएगा।



